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खाड़ी देशों से 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी डिपोर्ट, जानें पड़ोसियों ने किए थे कैसे-कैसे कांड

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Aug 21, 2026 05:54 pm IST,  Updated : Aug 21, 2026 05:54 pm IST

खाड़ी देशों से मार्च से जुलाई के बीच 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को डिपोर्ट किया गया है। सऊदी अरब ने 15,500 और UAE ने 3,803 लोगों को वापस भेजा है। वापस भेजने के कारणों में सुरक्षा चिंताएं, वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग अपराध और फर्जी दस्तावेज शामिल रहे।

Pakistanis deported from Gulf countries, Saudi Arabia Pakistanis deported- India TV Hindi
सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सऊदी अरब और यूएई से डिपोर्ट हुए हैं। Image Source : INDIA TV

लाहौर: ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के दौरान अब खाड़ी देशों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर सुरक्षा जांच और कार्रवाई बढ़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हाल के महीनों में 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को खाड़ी देशों से डिपोर्ट किया गया है। इनमें सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी कि UAE से बाहर भेजे गए लोगों की है। बता दें कि पाकिस्तान इन दोनों ही देशों के साथ अपने अच्छे रिश्ते होने की बात कहता रहता है। हालांकि खाड़ी देशों ने इस मामले में एक तरह से पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने बेइज्जत किया है।

पाकिस्तानियों ने किए थे कैसे-कैसे कांड?

बता दें कि यह आंकड़ा पाकिस्तान के नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय की ओर से गुरुवार को नेशनल असेंबली में पेश किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ पाकिस्तानियों को अपने शहरों में हुए ईरानी हमलों से जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री बनाने या सोशल मीडिया पर अपलोड करने के आरोप में भी हिरासत में लिया गया या डिपोर्ट किया गया। मंत्रालय के अनुसार, ये डिपोर्टेशन 1 मार्च से 13 जुलाई के बीच GCC के 6 देशों में हुए। GCC में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। पाकिस्तानियों को अलग-अलग कारणों से देश से बाहर भेजा गया। इनमें सुरक्षा संबंधी चिंताएं, वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना, अवैध तरीके से प्रवेश, भीख मांगना, ड्रग्स से जुड़े अपराध, शरण के आवेदन खारिज होना और फर्जी या गलत दस्तावेज शामिल हैं।

अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का शिकार

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 4,628 ऐसे लोगों को डिपोर्ट किया गया जिन्हें फरार बताया गया था। इसके अलावा 1,294 पाकिस्तानी जेल भेजे गए, 968 लोगों को ब्लैकलिस्ट किया गया और पासपोर्ट खोने से जुड़े 1,155 डिपोर्टेशन मामले सामने आए। वहीं, 689 पाकिस्तानियों को वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण डिपोर्ट किया गया। 342 मामलों में लोगों को खाड़ी देशों में प्रवेश ही नहीं दिया गया। हालांकि, 6,000 से ज्यादा डिपोर्टेशन को मंत्रालय ने सिर्फ ‘अन्य’ श्रेणी में रखा है। इस श्रेणी के मामलों की विस्तृत जानकारी मंत्रालय ने साझा नहीं की।

सऊदी अरब से सबसे ज्यादा पाकिस्तानी निकाले गए

आंकड़ों में सऊदी अरब सबसे ऊपर है। वहां से 15,500 पाकिस्तानी डिपोर्ट किए गए। इसके बाद UAE से 3,803, ओमान से 1,606, बहरीन से 521, कतर से 429 और कुवैत से 97 पाकिस्तानियों को वापस भेजा गया। पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने गुरुवार को पूरक सवालों के जवाब में बताया कि ये आंकड़े केवल उन लोगों के हैं जिन्हें संबंधित देशों के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से हिरासत में लिया और फिर पाकिस्तानी मिशनों की ओर से इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी किए जाने के बाद डिपोर्ट किया गया। उन्होंने साफ किया कि जो पाकिस्तानी अपनी इच्छा से वापस लौटे या वैध पासपोर्ट के साथ वापस आए, वे इन आंकड़ों में शामिल नहीं हैं।

ईरानी हमलों के वीडियो बनाने पर भी हुई कार्रवाई

ईरान से जुड़े संघर्ष के दौरान कुछ पाकिस्तानियों पर ईरानी हमलों से संबंधित वीडियो बनाने, पोस्ट करने या दोबारा शेयर करने के आरोप में भी कार्रवाई हुई। पाकिस्तानी अखबार Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में बहरीन ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 5 पाकिस्तानी नागरिक थे। इन लोगों पर ईरानी हमलों के असर से जुड़े वीडियो को फिल्माने, प्रकाशित करने और दोबारा पोस्ट करने का आरोप था। संघर्ष के दौरान कुछ खाड़ी देशों में शिया समुदाय के लोगों की जांच और निगरानी भी बढ़ गई।

पाकिस्तान को खाड़ी देशों ने यूं दिया करारा झटका

खाड़ी देशों से इतनी बड़ी संख्या में पाकिस्तानियों के डिपोर्ट होने की खबर ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र में लाखों पाकिस्तानी रहते और काम करते हैं। ये देश पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां काम करने वाले पाकिस्तानी बड़ी मात्रा में पैसा अपने देश भेजते हैं, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण मदद मिलती है। ऐसे में सुरक्षा जांच और डिपोर्टेशन बढ़ने से खाड़ी देशों में रहने वाले पाकिस्तानी प्रवासी कामगारों और दूसरे नागरिकों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। (PTI से इनपुट्स के साथ)

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